श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  13.109.55 
अन्नं बुभुक्षमाणस्तु त्रिर्मुखेन स्पृशेदप:।
भुक्त्वा चान्नं तथैव त्रिर्द्वि: पुन: परिमार्जयेत्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
भोजन करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को पहले तीन बार जल का स्पर्श (आचमन) करना चाहिए। फिर भोजन करने के बाद भी तीन बार कुल्ला करना चाहिए। फिर अंगूठे के मूल से दो बार मुँह पोंछना चाहिए।
 
A person who wishes to eat should first touch water with his mouth three times (Aachmana). Then after eating also he should rinse his mouth three times. Then wipe his mouth twice with the base of his thumb. 55.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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