श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  13.109.53 
स्रजश्च नावकृष्येत न बहिर्धारयीत च।
उदक्यया च सम्भाषां न कुर्वीत कदाचन॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
माला को कभी भी अपने गले में न डालें। इसे अपने कपड़ों के ऊपर न पहनें। मासिक धर्म वाली महिला से कभी बात न करें। 53.
 
Never pull the garland around your neck. Do not wear it over your clothes. Never talk to a menstruating woman. 53.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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