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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण
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श्लोक 48
श्लोक
13.109.48
उदक्शिरा न स्वपेत तथा प्रत्यक्शिरा न च।
प्राक्शिरास्तु स्वपेद् विद्वानथवा दक्षिणाशिरा:॥ ४८॥
अनुवाद
उत्तर या पश्चिम की ओर सिर करके मत सोओ। विद्वान व्यक्ति को पूर्व या दक्षिण की ओर सिर करके सोना चाहिए ॥48॥
Do not sleep with your head towards the north or west. A learned person should sleep with his head towards the east or south. ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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