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mahabharat 13.109.42: प्रतिदिन अग्नि की सेवा करो, प्रतिदिन भिखारियों को दान दो और प्रतिदिन मौन रहकर अपने दाँत साफ करो।   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  13.109.42 
नित्यमग्निं परिचरेद् भिक्षां दद्याच्च नित्यदा।
वाग्यतो दन्तकाष्ठं च नित्यमेव समाचरेत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
प्रतिदिन अग्नि की सेवा करो, प्रतिदिन भिखारियों को दान दो और प्रतिदिन मौन रहकर अपने दाँत साफ करो।
 
Serve Agni daily, give alms to beggars daily and brush your teeth daily in silence.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)