श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  13.109.4-5 
भीष्म उवाच
अत्र तेऽहं प्रवक्ष्यामि यन्मां त्वमनुपृच्छसि।
अल्पायुर्येन भवति दीर्घायुर्वापि मानव:॥ ४॥
येन वा लभते कीर्तिं येन वा लभते श्रियम्।
यथा वर्तयन् पुरुष: श्रेयसा सम्प्रयुज्यते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भीष्म ने कहा- युधिष्ठिर! तुम मुझसे जो पूछ रहे हो, उसका उत्तर मैं तुम्हें देता हूँ। मैं तुम्हें वह कारण बताऊँगा जिससे मनुष्य अल्पायु होता है, वह उपाय जिससे वह दीर्घायु होता है, वह मार्ग जिससे वह यश और धन का भागी होता है तथा वह आचरण जिससे मनुष्य को सौभाग्य प्राप्ति का अवसर प्राप्त होता है। सुनो।
 
Bhishma said- Yudhishthira! I will answer what you are asking me. I will tell you the reason why a man lives a short life, the means by which he lives a long life, the way by which he becomes a part of fame and wealth and the behavior by which a man gets the opportunity of good fortune. Listen.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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