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mahabharat 13.109.36: नास्तिकता, वेदों की निंदा, देवताओं को कोसना, द्वेष, अहंकार, मद और कठोरता- इन दुर्गुणों का त्याग कर देना चाहिए ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.109.36 
नास्तिक्यं वेदनिन्दां च देवतानां च कुत्सनम्।
द्वेषस्तम्भोऽभिमानं च तैक्ष्ण्यं च परिवर्जयेत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
नास्तिकता, वेदों की निंदा, देवताओं को कोसना, द्वेष, अहंकार, मद और कठोरता- इन दुर्गुणों का त्याग कर देना चाहिए ॥36॥
 
Atheism, condemnation of the Vedas, cursing the gods, malice, arrogance, pride and harshness – these bad qualities should be abandoned. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)