Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.109.31: दूसरों की भावनाओं को ठेस न पहुँचाओ। कठोर वचन न बोलो, दूसरों को नीचा न दिखाओ। जो कटु वचन दूसरों को व्यथित करते हैं, वे तुम्हें पाप के लोक में ले जाएँगे। अतः ऐसे वचन कभी न बोलो॥ 31॥ | mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नारुन्तुद: स्यान्न नृशंसवादी
न हीनत: परमभ्याददीत।
ययास्य वाचा पर उद्विजेत
न तां वदेद् रुशतीं पापलोक्याम्॥ ३१॥
अनुवाद
दूसरों की भावनाओं को ठेस न पहुँचाओ। कठोर वचन न बोलो, दूसरों को नीचा न दिखाओ। जो कटु वचन दूसरों को व्यथित करते हैं, वे तुम्हें पाप के लोक में ले जाएँगे। अतः ऐसे वचन कभी न बोलो॥ 31॥
Do not hurt the feelings of others. Do not speak cruel words, do not degrade others. The harsh words which cause agitated others will take you to the world of sinners. Hence, never speak such words.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥