| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण » श्लोक 3 |
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| | | | श्लोक 13.109.3  | तपसा ब्रह्मचर्येण जपहोमैस्तथौषधै:।
कर्मणा मनसा वाचा तन्मे ब्रूहि पितामह॥ ३॥ | | | | | | अनुवाद | | पितामह! कृपया मुझे बताइए कि मनुष्य को मन, वाणी या शरीर से तप, ब्रह्मचर्य, जप, हवन और औषधि में से किसका आचरण करना चाहिए, जिससे उसे लाभ हो ॥3॥ | | | | Grandfather! Please tell me which of the following should a man adopt through his mind, speech or body, among penance, celibacy, chanting, offering of fire and medicine, so that he may attain benefit. ॥ 3॥ | | ✨ ai-generated | | |
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