Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.109.18-19h: ग्रहण और मध्याह्न के समय सूर्य को नहीं देखना चाहिए और जल में सूर्य का प्रतिबिम्ब भी नहीं देखना चाहिए। ऋषियों ने प्रतिदिन संध्यावंदन करके दीर्घायु प्राप्त की थी। अतः प्रत्येक ब्राह्मण को सदैव मौन रहना चाहिए और प्रातः और सायं संध्या करनी चाहिए। | mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नोपसृष्टं न वारिस्थं न मध्यं नभसो गतम्।
ऋषयो नित्यसंध्यत्वाद् दीर्घमायुरवाप्नुवन्॥ १८॥
तस्मात् तिष्ठेत् सदा पूर्वां पश्चिमां चैव वाग्यत:।
अनुवाद
ग्रहण और मध्याह्न के समय सूर्य को नहीं देखना चाहिए और जल में सूर्य का प्रतिबिम्ब भी नहीं देखना चाहिए। ऋषियों ने प्रतिदिन संध्यावंदन करके दीर्घायु प्राप्त की थी। अतः प्रत्येक ब्राह्मण को सदैव मौन रहना चाहिए और प्रातः और सायं संध्या करनी चाहिए।
One should not look at the sun during eclipse and noon and should not look at the reflection of the sun in water. The sages attained long life by performing Sandhya worship every day. Therefore, every Brahmin should always remain silent and perform morning and evening Sandhya. 18 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥