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mahabharat 13.109.156: पूर्वकाल में ब्रह्माजी ने सब वर्णों के लोगों पर दया करके इस पुण्यमय धर्म का उपदेश दिया था। यह कल्याण का परम आधार है तथा यश, आयु और स्वर्ग को देने वाला है। 156॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 156
 
 
श्लोक  13.109.156 
एतद् यशस्यमायुष्यं स्वर्ग्यं स्वस्त्ययनं महत् ।
अनुकम्प्य सर्ववर्णान् ब्रह्मणा समुदाहृतम्॥ १५६॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में ब्रह्माजी ने सब वर्णों के लोगों पर दया करके इस पुण्यमय धर्म का उपदेश दिया था। यह कल्याण का परम आधार है तथा यश, आयु और स्वर्ग को देने वाला है। 156॥
 
In earlier times, Lord Brahma had shown kindness to people of all castes and preached this virtuous religion. It is the ultimate basis of well-being and brings fame, longevity and heaven. 156॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)