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mahabharat 13.109.15: जो पत्थर तोड़ता है, तिनके तोड़ता है, नाखून चबाता है तथा सदैव अशुद्ध और बेचैन रहता है, ऐसा बुरी आदतों वाला मनुष्य दीर्घायु नहीं पाता ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.109.15 
लोष्ठमर्दी तृणच्छेदी नखखादी च यो नर:।
नित्योच्छिष्ट: संकुसुको नेहायुर्विन्दते महत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो पत्थर तोड़ता है, तिनके तोड़ता है, नाखून चबाता है तथा सदैव अशुद्ध और बेचैन रहता है, ऐसा बुरी आदतों वाला मनुष्य दीर्घायु नहीं पाता ॥15॥
 
He who breaks stones, breaks straws, chews his nails and is always impure and restless, such a man with bad habits does not get long life. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)