श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 148-149h
 
 
श्लोक  13.109.148-149h 
गान्धर्वशास्त्रं च कला: परिज्ञेया नराधिप।
पुराणमितिहासाश्च तथाख्यानानि यानि च ॥ १४८॥
महात्मनां च चरितं श्रोतव्यं नित्यमेव ते।
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! आपको गान्धर्वशास्त्र (संगीत) तथा समस्त कलाओं का ज्ञान प्राप्त करना भी आवश्यक है। आपको प्रतिदिन पुराण, इतिहास, उपाख्यान तथा महात्माओं के चरित्रों का श्रवण करना चाहिए। 148
 
Nareshwar! It is also necessary for you to acquire knowledge of Gandharva Shastra (music) and all the arts. You should listen to Puranas, history, anecdotes and characters of Mahatmas every day. 148
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas