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mahabharat 13.109.147: जो राजा अपनी प्रजा का पालन करने में सदैव तत्पर रहता है, उसे कभी हानि नहीं उठानी पड़ती । भरतनंदन ! तुम्हें तर्क और शब्दावली दोनों का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए । 147॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 147
 
 
श्लोक  13.109.147 
प्रजापालनयुक्तश्च न क्षतिं लभते क्वचित्।
युक्तिशास्त्रं च ते ज्ञेयं शब्दशास्त्रं च भारत॥ १४७॥
 
 
अनुवाद
जो राजा अपनी प्रजा का पालन करने में सदैव तत्पर रहता है, उसे कभी हानि नहीं उठानी पड़ती । भरतनंदन ! तुम्हें तर्क और शब्दावली दोनों का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए । 147॥
 
The king who is always ready to take care of his subjects never has to suffer any loss. Bharatnandan! You should acquire knowledge of both logic and terminology. 147॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)