श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 140
 
 
श्लोक  13.109.140 
संध्यायां च न भुञ्जीत न स्नायेन्न तथा पठेत्।
प्रयतश्च भवेत् तस्यां न च किंचित् समाचरेत्॥ १४०॥
 
 
अनुवाद
संध्या के समय स्नान, भोजन और अध्ययन न करें। उस समय शुद्ध मन से ध्यान और पूजन करना चाहिए। अन्य कोई कार्य नहीं करना चाहिए ॥140॥
 
Do not bathe, eat or study during the evening. At that time, one should meditate and worship with a pure mind. One should not do any other work.॥ 140॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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