श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.109.14 
अक्रोधन: सत्यवादी भूतानामविहिंसक:।
अनसूयुरजिह्मश्च शतं वर्षाणि जीवति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो क्रोध से रहित, सत्यवादी, किसी प्राणी को कष्ट न देने वाला, दोषरहित और छल-कपट से रहित है, वह सौ वर्ष तक जीवित रहता है ॥14॥
 
He who is free from anger, truthful, does not harm any living being, is faultless and without deceit lives for a hundred years. ॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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