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श्लोक 13.109.137  |
न चेर्ष्या स्त्रीषु कर्तव्या रक्ष्या दाराश्च सर्वश:।
अनायुष्या भवेदीर्ष्या तस्मादीर्ष्यां विवर्जयेत्॥ १३७॥ |
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| अनुवाद |
| अपनी पत्नी की हर प्रकार से रक्षा करनी चाहिए । स्त्रियों से ईर्ष्या करना उचित नहीं है । ईर्ष्या आयु को क्षीण करती है । अतः उसका त्याग कर देना ही श्रेयस्कर है ॥137॥ |
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| One should protect his wife by all means. It is not right to be jealous of women. Jealousy shortens one's lifespan. Therefore it is better to abandon her.॥ 137॥ |
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