श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  13.109.137 
न चेर्ष्या स्त्रीषु कर्तव्या रक्ष्या दाराश्च सर्वश:।
अनायुष्या भवेदीर्ष्या तस्मादीर्ष्यां विवर्जयेत्॥ १३७॥
 
 
अनुवाद
अपनी पत्नी की हर प्रकार से रक्षा करनी चाहिए । स्त्रियों से ईर्ष्या करना उचित नहीं है । ईर्ष्या आयु को क्षीण करती है । अतः उसका त्याग कर देना ही श्रेयस्कर है ॥137॥
 
One should protect his wife by all means. It is not right to be jealous of women. Jealousy shortens one's lifespan. Therefore it is better to abandon her.॥ 137॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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