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mahabharat 13.109.135: युधिष्ठिर! जो पुरुष अपना कल्याण चाहता है, उसे अपने से उच्च या समान कुल में विवाह करना चाहिए। नीच कुल की या अपवित्र कन्या से कभी विवाह नहीं करना चाहिए। 135॥   |   mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  13.109.135 
महाकुले निवेष्टव्यं सदृशे वा युधिष्ठिर।
अवरा पतिता चैव न ग्राह्या भूतिमिच्छता॥ १३५॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जो पुरुष अपना कल्याण चाहता है, उसे अपने से उच्च या समान कुल में विवाह करना चाहिए। नीच कुल की या अपवित्र कन्या से कभी विवाह नहीं करना चाहिए। 135॥
 
Yudhisthira! A man who wants his own welfare should marry into a family of a higher or equal family than his own. One should never marry a low caste or impure girl. 135॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)