श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 122-123h
 
 
श्लोक  13.109.122-123h 
महाकुले प्रसूतां च प्रशस्तां लक्षणैस्तथा॥ १२२॥
वय:स्थां च महाप्राज्ञ: कन्यामावोढुमर्हति।
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष को ऐसी कन्या से विवाह करना चाहिए जो कुलीन कुल में जन्मी हो, जिसके अच्छे गुणों की प्रशंसा की जाती हो तथा जो विवाह योग्य आयु की हो। 122 1/2
 
A wise man should marry a girl who is born in a noble family, is praised for her good qualities and has attained a marriageable age. 122 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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