श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 121-122h
 
 
श्लोक  13.109.121-122h 
सौहित्यं न च कर्तव्यं रात्रौ न च समाचरेत्॥ १२१॥
द्विजच्छेदं न कुर्वीत भुक्त्वा न च समाचरेत्।
 
 
अनुवाद
रात्रि में न तो स्वयं अधिक भोजन करें, न ही दूसरों को अधिक भोजन कराएँ। भोजन के बाद जल्दबाजी न करें। ब्राह्मणों की हत्या कभी न करें। 121 1/2।
 
Do not overeat at night yourself, nor feed others overeat. Do not rush after eating. Never kill Brahmins. 121 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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