श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.109.12 
विशीला भिन्नमर्यादा नित्यं संकीर्णमैथुना:।
अल्पायुषो भवन्तीह नरा निरयगामिन:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जो पुरुष दुराचारी हैं, सदा धर्म की मर्यादा का उल्लंघन करते हैं और अन्य जाति की स्त्रियों के साथ संबंध रखते हैं, वे इस लोक में अल्पायु होते हैं और मरने के बाद नरक में जाते हैं ॥12॥
 
Those men who are immoral, who always violate the limits of religion and who have relations with women of other castes, have short lives in this world and go to hell after death. ॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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