श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 119-120h
 
 
श्लोक  13.109.119-120h 
नक्तं न कुर्यात् पित्र्याणि भुक्त्वा चैव प्रसाधनम्॥ ११९॥
पानीयस्य क्रिया नक्तं न कार्या भूतिमिच्छता।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपना कल्याण चाहता है, उसे रात्रि में श्राद्ध नहीं करना चाहिए। भोजन करने के बाद उसे बाल नहीं कटवाने चाहिए तथा रात्रि में जल से स्नान करना भी उचित नहीं है।॥119 1/2॥
 
A man who seeks his welfare should not perform Shraddha rituals at night. He should not perform the ritual of shaving his hair after eating food and it is also not appropriate to take a bath with water at night.॥ 119 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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