श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 118-119h
 
 
श्लोक  13.109.118-119h 
संध्यायां न स्वपेद्‍राजन् विद्यां न च समाचरेत्॥ ११८॥
न भुञ्जीत च मेधावी तथायुर्विन्दते महत्।
 
 
अनुवाद
महाराज! बुद्धिमान व्यक्ति को संध्या काल में न तो सोना चाहिए, न ही अध्ययन करना चाहिए और न ही भोजन करना चाहिए। ऐसा करने से उसे दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
 
King! A wise man should neither sleep nor study nor eat during the evening twilight. By doing so, he attains a long life. 118 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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