Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.109.117-118h: हे समस्त मनुष्यों के स्वामी! जो विद्वान् मनुष्य उन्नति करना चाहता है, उसके लिए उचित है कि वह ब्राह्मण द्वारा वास्तु-पूजा प्रारम्भ करे तथा सदैव अच्छे शिल्पी द्वारा निर्मित घर में निवास करे। | mahabharat अध्याय 13.109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मणस्थपतिभ्यां च निर्मितं यन्निवेशनम्॥ ११७॥
तदावसेत् सदा प्राज्ञो भवार्थी मनुजेश्वर।
अनुवाद
हे समस्त मनुष्यों के स्वामी! जो विद्वान् मनुष्य उन्नति करना चाहता है, उसके लिए उचित है कि वह ब्राह्मण द्वारा वास्तु-पूजा प्रारम्भ करे तथा सदैव अच्छे शिल्पी द्वारा निर्मित घर में निवास करे।
O Lord of all human beings! It is appropriate for a learned person who wants to progress, to start with the worship of Vastu by a Brahmin and to always live in a house built by a good craftsman. 117 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥