| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण » श्लोक 116-117h |
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| | | | श्लोक 13.109.116-117h  | वैद्यानां बालवृद्धानां भृत्यानां च युधिष्ठिर।
बन्धूनां ब्राह्मणानां च तथा शारणिकस्य च॥ ११६॥
सम्बन्धिनां च राजेन्द्र तथाऽऽयुर्विन्दते महत्। | | | | | | अनुवाद | | राजा युधिष्ठिर! वैद्य, बालक, वृद्ध, सेवक, सम्बन्धी, ब्राह्मण, शरणार्थी और सम्बन्धियों की स्त्रियों के पास कभी न जाएँ। ऐसा करने से दीर्घायु प्राप्त होती है। | | | | King Yudhishthira! Never go to doctors, children, old people, servants, relatives, Brahmins, refugees and wives of relatives. By doing this, one attains a long life. 116 1/2. | | ✨ ai-generated | | |
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