श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  13.109.110 
ब्राह्मणार्थे च यच्छौचं तच्च मे शृणु कौरव।
पवित्रं च हितं चैव भोजनाद्यन्तयोस्तथा॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
सुनो, अब मैं तुम्हें ब्राह्मण के लिए भोजन के प्रारम्भ और अन्त में पवित्र एवं हितकारी शुद्धि के नियमों के विषय में बता रहा हूँ ॥110॥
 
Listen, I am now telling you about the sacred and beneficial purification rules for a Brahmin at the beginning and the end of his meal. ॥ 110॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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