श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.109.11 
ये नास्तिका निष्क्रियाश्च गुरुशास्त्राभिलङ्घिन:।
अधर्मज्ञा दुराचारास्ते भवन्ति गतायुष:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो नास्तिक हैं, आलसी हैं, गुरु और शास्त्र की आज्ञा का उल्लंघन करते हैं, धर्म को नहीं जानते और दुष्ट हैं, उनकी आयु कम हो जाती है ॥11॥
 
The lifespan of those who are atheists, are lazy, violate the orders of their Guru and scriptures, do not know religion and are wicked, gets shortened. ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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