श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 109: आयुकी वृद्धि और क्षय करनेवाले शुभाशुभ कर्मोंके वर्णनसे गृहस्थाश्रमके कर्तव्योंका विस्तारपूर्वक निरूपण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.109.1 
युधिष्ठिर उवाच
शतायुरुक्त: पुरुष: शतवीर्यश्च जायते।
कस्मान्म्रियन्ते पुरुषा बाला अपि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - पितामह! शास्त्रों में कहा गया है कि 'मनुष्य की आयु सौ वर्ष होती है। वह सैकड़ों प्रकार की शक्तियों के साथ जन्म लेता है।' किन्तु मैं देखता हूँ कि बहुत से लोग बचपन में ही मर जाते हैं। ऐसा क्यों होता है?॥1॥
 
Yudhishthira said - Grandfather! It is said in the scriptures that 'the lifespan of a human being is hundred years. He is born with hundreds of kinds of powers.' But I see that many people die in childhood. Why does this happen?॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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