तुरायणं हि व्रतमप्यधृष्य-
मक्रोधनोऽकरवं त्रिंशतोऽब्दान्।
शतं गवामष्टशतानि चैव
दिने दिने ह्यददं ब्राह्मणेभ्य:॥ ३४॥
अनुवाद
तीस वर्षों तक मैंने क्रोध न करते हुए कठिन व्रत का पालन किया, जिसे तुरयण व्रत कहते हैं, जिसमें मैं प्रतिदिन ब्राह्मणों को नौ सौ गायें दान में देता था।
For thirty years, without becoming angry, I observed the difficult fast known as Turayana, in which I gave nine hundred cows in charity to brahmins every day.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥