श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 108: ब्रह्माजी और भगीरथका संवाद, यज्ञ, तप, दान आदिसे भी अनशन-व्रतकी विशेष महिमा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.108.16 
वाजिनां बाह्लिजातानामयुतान्यददं दश।
कर्काणां हेममालानां न च तेनाहमागत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मैंने वह्लीक देश में उत्पन्न एक लाख श्वेत अश्वों को स्वर्ण की मालाओं से सुसज्जित करके ब्राह्मणों को दान कर दिया; किन्तु उस पुण्य कर्म से भी मैं यहाँ नहीं आया हूँ।
 
I decorated one lakh white horses born in the country of Vahlika with garlands of gold and donated them to the Brahmins; but even by that good deed I have not come here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)