श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 107: भिन्न-भिन्न कर्मोंके अनुसार भिन्न-भिन्न लोकोंकी प्राप्ति बतानेके लिये धृतराष्ट्ररूपधारी इन्द्र और गौतम ब्राह्मणके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.107.2 
भीष्म उवाच
कर्मभि: पार्थ नानात्वं लोकानां यान्ति मानवा:।
पुण्यान् पुण्यकृतो यान्ति पापान् पापकृतो नरा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - कुन्तीनन्दन! मनुष्य अपने-अपने कर्मों के अनुसार भिन्न-भिन्न लोकों में जाते हैं। पुण्य कर्म करने वाले पुण्य लोकों में जाते हैं और पापी मनुष्य पाप लोकों में जाते हैं। 2॥
 
Bhishmaji said – Kuntinandan! Human beings go to different worlds according to their deeds. Those who do virtuous deeds go to virtuous worlds and sinful people go to sinful worlds. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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