श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 107: भिन्न-भिन्न कर्मोंके अनुसार भिन्न-भिन्न लोकोंकी प्राप्ति बतानेके लिये धृतराष्ट्ररूपधारी इन्द्र और गौतम ब्राह्मणके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.107.16 
गौतम उवाच
वैवस्वती संयमनी जनानां
यत्रानृतं नोच्यते यत्र सत्यम्।
यत्राबला बलिनं यातयन्ति
तत्र त्वाहं हस्तिनं यातयिष्ये॥ १६॥
 
 
अनुवाद
गौतम बोले - "जिस स्थान पर कोई झूठ नहीं बोलता, जहाँ सदा सत्य बोला जाता है और जहाँ दुर्बल भी बलवानों से अपने साथ हुए अन्याय का बदला लेते हैं, वह मनुष्यों को वश में रखने वाला यमराज का नगर संयमनी नाम से प्रसिद्ध है। वहीं मैं तुमसे अपना हाथी ले लूँगा॥ 16॥
 
Gautama said, "The place where no one lies, where the truth is always spoken and where even the weak take revenge from the strong for the injustice done to them, that city of Yamaraja which keeps men under control is famous by the name of Sanyamani. There I will collect my elephant from you.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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