धृतराष्ट्र उवाच
ये निष्क्रिया नास्तिकाश्रद्दधाना:
पापात्मान इन्द्रियार्थे निविष्टा:।
यमस्य ते यातनां प्राप्नुवन्ति
परं गन्ता धृतराष्ट्रो न तत्र॥ १५॥
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - जो लोग निष्क्रिय, नास्तिक, श्रद्धाहीन, पापी और इन्द्रियों के विषयों में आसक्त हैं, वे ही यम की यातना को प्राप्त होते हैं; परंतु राजा धृतराष्ट्र वहाँ जाना नहीं चाहते ॥15॥
Dhritarashtra said – Those who are inactive, atheist, faithless, sinful and attached to the objects of the senses, only they attain Yama's torture; But King Dhritarashtra does not want to go there. 15॥