श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 107: भिन्न-भिन्न कर्मोंके अनुसार भिन्न-भिन्न लोकोंकी प्राप्ति बतानेके लिये धृतराष्ट्ररूपधारी इन्द्र और गौतम ब्राह्मणके संवादका उल्लेख  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.107.1 
युधिष्ठिर उवाच
एके लोका: सुकृतिन: सर्वे त्वाहो पितामह।
तत्र तत्रापि भिन्नास्ते तन्मे ब्रूहि पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! (मृत्यु के बाद) क्या सभी पुण्यात्माएँ एक ही लोक में जाते हैं या वहाँ जिन लोकों को प्राप्त होते हैं, उनमें कोई अन्तर होता है? पितामह! यह बताइए। 1॥
 
Yudhishthir asked – Grandfather! (After death) do all the virtuous souls go to the same world or is there a difference in the worlds they attain there? grandfather Sir! Tell me this. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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