Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.106.26: क्षत्रिय ने कहा, "चाण्डाल! तुम्हें वह उपाय समझ लेना चाहिए जिससे तुम्हें मोक्ष मिलेगा। यदि तुम ब्राह्मण की रक्षा के लिए अपने प्राण त्याग दोगे, तो तुम्हें अभीष्ट गति प्राप्त होगी।"   |   mahabharat अध्याय 13.106: ब्राह्मणोंके धनका अपहरण करनेसे प्राप्त होनेवाले दोषके विषयमें क्षत्रिय और चाण्डालका संवाद तथा ब्रह्मस्वकी रक्षामें प्राणोत्सर्ग करनेसे चाण्डालको मोक्षकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 106: ब्राह्मणोंके धनका अपहरण करनेसे प्राप्त होनेवाले दोषके विषयमें क्षत्रिय और चाण्डालका संवाद तथा ब्रह्मस्वकी रक्षामें प्राणोत्सर्ग करनेसे चाण्डालको मोक्षकी प्राप्ति  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.106.26 
राजन्य उवाच
चाण्डाल प्रतिजानीहि येन मोक्षमवाप्स्यसि।
ब्राह्मणार्थे त्यजन् प्राणान् गतिमिष्टामवाप्स्यसि॥ २६॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय ने कहा, "चाण्डाल! तुम्हें वह उपाय समझ लेना चाहिए जिससे तुम्हें मोक्ष मिलेगा। यदि तुम ब्राह्मण की रक्षा के लिए अपने प्राण त्याग दोगे, तो तुम्हें अभीष्ट गति प्राप्त होगी।"
 
The Kshatriya said, "Chandala! You should understand the method by which you will get salvation. If you sacrifice your life to save a Brahmin, then you will get the desired destination." 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)