श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 106: ब्राह्मणोंके धनका अपहरण करनेसे प्राप्त होनेवाले दोषके विषयमें क्षत्रिय और चाण्डालका संवाद तथा ब्रह्मस्वकी रक्षामें प्राणोत्सर्ग करनेसे चाण्डालको मोक्षकी प्राप्ति  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.106.24 
जातिस्मरत्वं च मम केनचित् पूर्वकर्मणा।
शुभेन येन मोक्षं वै प्राप्तुमिच्छाम्यहं नृप॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! पूर्वजन्म के किसी पुण्य कर्म के प्रभाव से मुझे पूर्वजन्म की बातें स्मरण हो रही हैं, जिसके कारण मैं मोक्ष प्राप्ति की इच्छा कर रहा हूँ॥ 24॥
 
O Lord of men! Due to the influence of some good deed of the past, I am remembering the things of my previous life, due to which I desire to attain salvation. ॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)