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mahabharat 13.104.9: शत्रु दमन! वे देवेश्वर नहुष पूर्ववत् विधिपूर्वक समस्त देवताओं का पूजन करते थे॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.104.9 
देवानभ्यर्चयच्चापि विधिवत् स सुरेश्वर:।
सर्वानेव यथान्यायं यथापूर्वमरिंदम॥ ९॥
 
 
अनुवाद
शत्रु दमन! वे देवेश्वर नहुष पूर्ववत् विधिपूर्वक समस्त देवताओं का पूजन करते थे॥9॥
 
Enemy suppression! That Deveshwar Nahush used to worship all the Gods in proper manner as before. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)