Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.104.27-28: महामुने! तत्पश्चात् सब ओर से निन्दा सुनकर यह मूर्ख देवेन्द्र विवश हो जायेगा और मैं ऐश्वर्य के बल से मोहित हुए इस पापी नहुष को आपके देखते-देखते पृथ्वी पर गिरा दूँगा। अथवा मुने! जैसा आप चाहेंगे वैसा ही करूँगा। 27-28॥ | mahabharat अध्याय 13.104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत एनं सुदुर्बुद्धिं धिक्शब्दाभिहतत्विषम्।
धरण्यां पातयिष्यामि पश्यतस्ते महामुने॥ २७॥
नहुषं पापकर्माणमैश्वर्यबलमोहितम्।
यथा च रोचते तुभ्यं तथा कर्तास्म्यहं मुने॥ २८॥
अनुवाद
महामुने! तत्पश्चात् सब ओर से निन्दा सुनकर यह मूर्ख देवेन्द्र विवश हो जायेगा और मैं ऐश्वर्य के बल से मोहित हुए इस पापी नहुष को आपके देखते-देखते पृथ्वी पर गिरा दूँगा। अथवा मुने! जैसा आप चाहेंगे वैसा ही करूँगा। 27-28॥
Mahamune! Thereafter, hearing words of condemnation from all sides, this foolish Devendra will become helpless and I will bring this sinful Nahusha, deluded by the power of opulence, down on earth in front of your eyes. Or Mune! I will do as you please. 27-28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥