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mahabharat 13.104.24: आज मैं इस पापी और मूर्ख को इन्द्र के सिंहासन से नीचे गिराकर शतक्रतु को पुनः तुम्हारे देखते-देखते इन्द्र के सिंहासन पर बिठाऊँगा॥24॥   |   mahabharat अध्याय 13.104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.104.24 
अद्येन्द्रं स्थापयिष्यामि पश्यतस्ते शतक्रतुम्।
संचाल्य पापकर्माणमैन्द्रात् स्थानात् सुदुर्मतिम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
आज मैं इस पापी और मूर्ख को इन्द्र के सिंहासन से नीचे गिराकर शतक्रतु को पुनः तुम्हारे देखते-देखते इन्द्र के सिंहासन पर बिठाऊँगा॥24॥
 
Today, by throwing down this sinful and foolish person from the throne of Indra, I will once again place Shatkratu on the throne of Indra before your eyes. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)