Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.104.18: ऐसा वरदान प्राप्त होने के कारण न तो आपने और न ही मैंने इसे अब तक जलाया है। इसमें कोई संदेह नहीं है। उसी वरदान के कारण अब तक किसी अन्य महामुनि ने इसे जलाकर भस्म नहीं किया है और न ही इसे स्वर्ग से नीचे फेंका है॥18॥ | mahabharat अध्याय 13.104: नहुषका ऋषियोंपर अत्याचार तथा उसके प्रतीकारके लिये महर्षि भृगु और अगस्त्यकी बातचीत । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं न दग्ध: स मया भवता च न संशय:।
अन्येनाप्यृषिमुख्येन न दग्धो न च पातित:॥ १८॥
अनुवाद
ऐसा वरदान प्राप्त होने के कारण न तो आपने और न ही मैंने इसे अब तक जलाया है। इसमें कोई संदेह नहीं है। उसी वरदान के कारण अब तक किसी अन्य महामुनि ने इसे जलाकर भस्म नहीं किया है और न ही इसे स्वर्ग से नीचे फेंका है॥18॥
Because of having received such a boon, neither you nor I have burnt it till now. There is no doubt about this. Because of the same boon, no other great sage has burnt it to ashes till now nor has thrown it down from heaven.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥