Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.102.4: भगवान श्रीकृष्ण ने पूछा - वसुन्धरे ! गृहस्थ धर्म का आश्रय लेकर मुझे या मेरे समान किसी अन्य व्यक्ति को कौन-सा अनुष्ठान करना चाहिए ? गृहस्थ को किस कार्य को करने से सफलता मिलती है ?॥4॥ | mahabharat अध्याय 13.102: गृहस्थधर्म, पञ्चयज्ञ-कर्मके विषयमें पृथ्वीदेवी और भगवान् श्रीकृष्णका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वासुदेव उवाच
गार्हस्थ्यं धर्ममाश्रित्य मया वा मद्विधेन वा।
किमवश्यं धरे कार्यं किं वा कृत्वा कृतं भवेत्॥ ४॥
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण ने पूछा - वसुन्धरे ! गृहस्थ धर्म का आश्रय लेकर मुझे या मेरे समान किसी अन्य व्यक्ति को कौन-सा अनुष्ठान करना चाहिए ? गृहस्थ को किस कार्य को करने से सफलता मिलती है ?॥4॥
Lord Krishna asked - Vasundhara! Which ritual should I or any other person like me perform after taking shelter of the household religion? By doing what does a householder get success?॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥