श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 102: गृहस्थधर्म, पञ्चयज्ञ-कर्मके विषयमें पृथ्वीदेवी और भगवान‍् श्रीकृष्णका संवाद  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.102.18 
ततोऽन्नेन विशेषेण भोजयेदतिथीनपि।
अर्चापूर्वं महाराज तत: प्रीणाति मानवान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इसके बाद अतिथियों को आदरपूर्वक विशेष भोजन कराएँ। ऐसा करने से गृहस्थ सभी लोगों को संतुष्ट करता है।
 
Maharaj! After this, feed the guests with special food with respect. By doing this, a householder satisfies all the people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)