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mahabharat 13.100.d16: हे मातले! मैं उन लोगों को नमस्कार करता हूँ जिनकी शिक्षा ज्ञान के कारण शुद्ध है, जो सुविख्यात धर्म का पालन करना चाहते हैं और जिनकी शुचिता की प्रशंसा दूसरे लोग करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.100: सबके पूजनीय और वन्दनीय कौन हैं—इस विषयमें इन्द्र और मातलिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 100: सबके पूजनीय और वन्दनीय कौन हैं—इस विषयमें इन्द्र और मातलिका संवाद  »  श्लोक d16
 
 
श्लोक  13.100.d16 
ज्ञानप्रसन्नविद्यानां निरूढं धर्ममिच्छताम्।
परै: कीर्तितशौचानां मातले तान् नमाम्यहम्॥
 
 
अनुवाद
हे मातले! मैं उन लोगों को नमस्कार करता हूँ जिनकी शिक्षा ज्ञान के कारण शुद्ध है, जो सुविख्यात धर्म का पालन करना चाहते हैं और जिनकी शुचिता की प्रशंसा दूसरे लोग करते हैं।
 
O Matale! I salute those whose education is clean due to knowledge, who wish to follow the well-known religion and whose cleanliness is praised by others.
 
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)


 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)