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नेषितव्यं सदा वाचा द्विजेन नृपसत्तम।
न च प्रवक्तव्यमिह किंचिद् वर्णावरे जने॥ )
अनुवाद
श्रेष्ठ! ब्राह्मण को कभी भी अपनी वाणी से उपदेश देने की इच्छा नहीं करनी चाहिए। यदि वह ऐसा करता भी है, तो उसे कभी भी किसी निम्न जाति के व्यक्ति को उपदेश नहीं देना चाहिए।
The best! A Brahmin should never desire to preach through his voice. Even if he does, he should never give any advice to a low caste man.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥