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mahabharat 13.10.8: उस आश्रम में बहुत से व्रती तपस्वी आते हैं और वहाँ सूर्य और अग्नि के समान तेजस्वी अनेक भाग्यशाली ब्राह्मण निवास करते हैं ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 13.10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.10.8 
व्रतिभिर्बहुभि: कीर्णं तापसैरुपसेवितम्।
ब्राह्मणैश्च महाभागै: सूर्यज्वलनसंनिभै:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उस आश्रम में बहुत से व्रती तपस्वी आते हैं और वहाँ सूर्य और अग्नि के समान तेजस्वी अनेक भाग्यशाली ब्राह्मण निवास करते हैं ॥8॥
 
Many ascetics who are devoted to fasting visit that hermitage. Many fortunate Brahmins, as radiant as the Sun and the Fire, reside there. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)