श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  13.10.72 
उपदेशो न कर्तव्य: कदाचिदपि कस्यचित्।
उपदेशाद्धि तत् पापं ब्राह्मण: समवाप्नुयात्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण को कभी किसी को उपदेश नहीं देना चाहिए, क्योंकि उपदेश देने से वह शिष्य के पापों को स्वयं अपने ऊपर ले लेता है। 72.
 
A brahmin should never preach to anyone, because by preaching he himself takes upon himself the sins of the disciple. 72.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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