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श्लोक 13.10.72  |
उपदेशो न कर्तव्य: कदाचिदपि कस्यचित्।
उपदेशाद्धि तत् पापं ब्राह्मण: समवाप्नुयात्॥ ७२॥ |
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| अनुवाद |
| ब्राह्मण को कभी किसी को उपदेश नहीं देना चाहिए, क्योंकि उपदेश देने से वह शिष्य के पापों को स्वयं अपने ऊपर ले लेता है। 72. |
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| A brahmin should never preach to anyone, because by preaching he himself takes upon himself the sins of the disciple. 72. |
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