श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  13.10.68 
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्यास्त्रयो वर्णा द्विजातय:।
एतेषु कथयन् राजन् ब्राह्मणो न प्रदुष्यति॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
राजन! ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य- ये तीन वर्ण द्विजाति कहलाते हैं। जो ब्राह्मण इन्हें उपदेश देता है, वह दोष नहीं पाता॥68॥
 
Rajan! Brahmin, Kshatriya and Vaishya – these three castes are called double caste. The Brahmin who preaches to them is not at fault. 68॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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