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mahabharat 13.10.62: हे ब्राह्मण! हे महात्मा! हो सकता है इसके बाद तुम किसी और नीच योनि में जाओ। इसलिए हे ब्राह्मण! जितना चाहो उतना धन ले लो और अपने अन्तःकरण को शुद्ध करने का प्रयत्न करो।   |   mahabharat अध्याय 13.10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.10.62 
इतस्त्वमधमामन्यां मा योनिं प्राप्स्यसे द्विज।
गृह्यतां द्रविणं विप्र पूतात्मा भव सत्तम॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण! हे महात्मा! हो सकता है इसके बाद तुम किसी और नीच योनि में जाओ। इसलिए हे ब्राह्मण! जितना चाहो उतना धन ले लो और अपने अन्तःकरण को शुद्ध करने का प्रयत्न करो।
 
O Brahman! O great saint! It may happen that after this you fall into some other low birth. Therefore, O Brahmin! Take as much money as you want and try to purify your inner self. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)