श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  13.10.56 
प्रीयता हि तदा ब्रह्मन् ममानुग्रहबुद्धिना।
पितृकार्ये त्वया पूर्वमुपदेश: कृतोऽनघ॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप ब्रह्म! उन दिनों में आप मुझ पर बहुत स्नेह करते थे, अतः मुझ पर कृपा करने के उद्देश्य से आपने मुझे पितरों के निमित्त श्राद्धकर्म करने की विधि बताई थी ॥ 56॥
 
O sinless Brahman! In those days you loved me a lot; therefore, with the intention of bestowing favour upon me you taught me the necessary procedure for performing the rituals for the ancestors. ॥ 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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