श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 10: अनधिकारीको उपदेश देनेसे हानिके विषयमें एक शूद्र और तपस्वी ब्राह्मणकी कथा  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  13.10.53 
राजोवाच
एवमुक्ते त्वया विप्र यदवाच्यं भवेदपि।
अवश्यमेव वक्तव्यं शृणुष्वैकमना द्विज॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा- हे ब्राह्मण! यदि आपके इस प्रकार पूछने के बाद कोई ऐसी बात हो जो न कही जाए, तो वह भी अवश्य कहनी चाहिए। अतः कृपया ध्यानपूर्वक सुनें।
 
The king said- O Brahmin! If there is anything that should not be said after you ask me like this, then that too must be said. So please listen attentively.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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