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एवं स बहुशो राजन् पुरोधसमुपाहसत्।
लक्षयित्वा पुरोधास्तु बहुशस्तं नराधिपम्॥ ४३॥
उत्स्मयन्तं च सततं दृष्ट्वासौ मन्युमाविशत्।
अनुवाद
हे राजन! इस प्रकार राजा ने पुजारी का अनेक बार उपहास किया। जब पुजारी ने राजा को बार-बार हँसते और मुस्कुराते देखा, तो उसे बहुत दुःख और क्रोध हुआ।
O King! In this way the king ridiculed the priest many times. When the priest repeatedly and continuously saw the king laughing and smiling at him, he felt very sad and angry.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥